आजकल आरक्षण पर बोलने का मतलब ही मुसीबत मोल लेना हो गया है ,वसे ज्यादातर दलित इससे बचना चाहते है अफसोश की बात तो तब लगती है जब ग्रेजवेशन और मास्टर की डिग्री पाकर जब वो बोलते है की मुझे नहीं पता ये जाति-वाती क्या होती है| अरे मेरे मुर्ख भाइयो अब जाति प्रमाण पत्र कोई पांच मिनट में बनने वाला तो खेल है नहीं, जब जाति प्रमाण पत्र बनवाने गए थे उस दिन एक बात समझ में नहीं आई क्या की मेरे ठाकुर, ब्राहमण दोस्तों ने तो तहसील के चक्कर नहीं लगया फिर मुझे क्यों मिल रहा है ये तोहफा मै कोई ऊपर से आया हुआ एलियन का बेटा तो हु नहीँ आखिर सरकार और ये तहसीलदार मेरे पर क्यों महरबान है दरअसल मुर्ख तू समझने वाला होता तो उसी दिन समझ जाता जोकि तेरे जीवन का काला दिन था अब कितनी ही डिग्रीया लेले तू नहीं समझने वाला बस इतना समझ लो की जिस दिन जाति प्रमाण पत्र बने उसी दिन से तुम अलग हो तुम्हारी पहचान जाति है तुम्हारी शक्ति जाति इससे छुटकारा केवल सत्ता पाकर सामाजिक और संस्कृतिक क्रांति से ही पाया जा सकता है
बाबा साहेब ने कहा था कि अंतरजातिय विवाह से जाति व्यवस्था टूट कर बिखर जाएगी | दरअसल बा साहेब भी इन ब्राहमणों कि चालाकी को समझ नहीं पाये| आज बढ़ी संख्या में दलित -सवर्णों में आपसी शादी हो रही है लेकिन नतीजा आपके सामने है ज्यादातर दलित भाई शादी के बाद पूरा सम्मान नहीं मिलने के कारण फ्रस्टेड होते जा रहे है वे या तो परिवार को छोड़कर अकेले रहते है या आत्महत्या कर ले रहे है और बाद में उनके धन से उनकी पत्निया मजा कर रही है
हमारे परिवार टूट रहे है इस चाल से हमारा आरक्षण कोई और चाट रहा है ये जवलंत मुद्दा है इसे रोको नहीं तो हमारी पहचान संकट में है
पहले की तरह बस इतना कहूँगा की पहले दलितों के अन्दर की जातिया ख़त्म कर लो देश की जातियों को बाद में देख लेंगे
दलित -दलित में करंगे शादी --------------- जय भीम
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