वैसे तो पूरा भारत हि जाति के आतंक से आतंकित है लेकिन बात जब राजस्थान जिसे सामन्तवाद से ग्रसित स्टेट की किजाये तो जाति का अहंकार आसमान छूता है एक बात याद रखने योग्य यह है की ,राजस्थान विश्वविधालय के हॉस्टल कोई जवाहर लाल नहरू यूनिवर्सिटी और बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के होस्टलो की तर्ज के छात्रावास तो कतई नहीं है जिनका मतलब केवल रहने ,खाने और पढने के लिए किया जाता हो और नाही ये यूनिवर्सिटी कोई आवासीय यूनिवर्सिटी है | यहाँ कुछ चन्द प्रतिभावान छात्रों का हास्टल प्रवेश मिल पाता है और ये छात्र अपनी सामाजिक और राजनितिक हसियत के साथ प्रवेश पाते है, तो जातिय संघर्ष तो लाजमी है | जयपुर का हर एक हॉस्टल अपने आप को एक राष्ट्र समझता है जो हमको सीधे सीधे यूरोप के 19 शताब्दी की याद दिलाते है जहाँ हर एक राष्ट्र अपने को सक्तिशाली घोषित करते हुए बाकि पर अपनी धोंस जमाता आया है हॉस्टल की भाषा में हम इन सालो को रहना सिखा देंगे की जयपुर में रहते कसे है(white burden theory) फिर वो जाट हो या राजपूत या फिर हाल हि में एक मजबूत ताकत के रूप में उभरे दलित हॉस्टल (अरावली छात्रावास)हर कोई अपने को आस्ट्रिया समझता है तो कोइ फ़्रांस और कोई ज़र्मनी बस सब कोई अपनी जयपुर में धाक जमाना चाहता है अपराध और ताकत में कोई किसी से कम नहीं है और हर किसी को उनके राजनितिक आकाओ और ताकतवर लोगो का खुला समर्थन हाशिल है लेकिन यदि होस्टलो के इतिहास की बात की जाये तो हम कह सकते है की राजपूत और जाट हॉस्टल की ताकत का युग अब खत्म हो चूका है वसे तो जयपुर में सबसे ज्यादा हॉस्टल दलित जातियों के है जिनमे खटिक, रैगेर, चमार,अम्बेडकरऔर मीना है परन्तु अरावली की भाषा में इनको लीद हॉस्टल कहा जाता है जो निरे चूनचोद और डरपोक हॉस्टल है अरावली वालो की नजरो में वो किसी काम के नहीं है वो केवल जाति की ओछी राजनीती करते है अरावली दावा करता है कि वह जाति की राजनीति नहीं करता है उसकी लड़ाई यूरोप के ज़र्मनी की लड़ाई है जो कहता है की मैंने आत्मरक्षा के लिए सेना और हथियार इकठा किया है वसे हि वो तो केवल आत्मरक्षा के लिए अपने को मजबूत किया है और ये सच है की सुरुवात में अरावली पर जाट और राजपूतो और अन्य होस्टलो के हमले आया दिन होते रहते थे| उस पीड़ा और दर्द ने उन्हें हर बार कचोट आखिर उन्हें यूनिवर्सिटी में सम्मान की जिंदगी जीने के लिए संघर्ष का रास्ता अख्तियार करना पड़ा |इसमें कोई सदेह नहीं है की आज अरावली एक ताकतवर और मजबूत हॉस्टल है बल्कि उसने अपने गरीब और कमजोर भाई मीना, अम्बेडकर, रैगेर, खटिक और चमार होस्टलो को भी सुरक्षा कवच दिया है आज राजस्थान यूनिवर्सिटी का सबसे बड़ा हॉस्टल होने के नाते वह USSR की भूमिका में आ गया है जो न केवल खुद मजबूत है बल्कि उसने और होस्टलो को भी सुरक्षा दी है |और यही कारण है की वर्षो से जाति का गोरव और सम्मान हाथ में लेकर नाचने वाले अब दलितों के वर्चस्व की वजह से जाति हॉस्टल को हटाने की बात करने लगे | क्योकि हमें ये न भूलना चाइये की राजस्थान यूनिवर्सिटी की राजनीति में अरावली का एक मजबूत हिस्सा हैं और वह दिन दूर नहीं जब राजस्थान की राजनीति अरावली के कदम चूमती हुई दलित वर्चस्व की कहानी लिखेगी |